कुंभ से पहले अखाड़ा परिषद में बढ़ी गुटबाजी, नया उदासीन अखाड़े के समर्थन पर छिड़ा नया विवाद
पंजाब से आए संतों ने निरंजनी गुट को दिया समर्थन, नौ अखाड़ों का दावा
करौली शंकर महादेव का पलटवार समर्थन का दावा करने वाले वर्षों पहले ही अखाड़े से हो चुके हैं निष्कासित
वर्ष 2027 के महाकुंभ से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में चल रही गुटबाजी और गहरी होती दिखाई दे रही है। शुक्रवार को जूना अखाड़े में आयोजित साधु-संतों की बैठक में जहां कुंभ मेले की तैयारियों और अखाड़ों की एकजुटता पर चर्चा हुई, वहीं पंजाब से आए श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के सचिव महंत गणेश दास के नेतृत्व में संतों ने अखाड़ा परिषद के निरंजनी गुट को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी। इसके बाद निरंजनी गुट ने दावा किया कि अब उसे नौ अखाड़ों का समर्थन प्राप्त हो गया है, जो परिषद में बहुमत का आंकड़ा है। बता दें कि महाकुंभ-2027 की तैयारियों के बीच अखाड़ा परिषद और नया उदासीन अखाड़े में उभरा यह विवाद धार्मिक जगत में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी, महामंत्री हरिगिरि समेत विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा मौजूद रहे। परिषद पदाधिकारियों ने कहा कि 13 अखाड़ों वाली परिषद में अधिकांश अखाड़ों का समर्थन उनके साथ है और संगठन को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
नया उदासीन अखाड़े में भी सामने आई अंदरूनी खींचतान
अखाड़ा परिषद की गुटबाजी के बीच नया उदासीन अखाड़ा भी विवादों में घिर गया है। पंजाब से आए महंत गणेश दास ने परिषद को सौंपे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि अखाड़े के कुछ साधु-संत परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुंभ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में देवताओं का पारंपरिक विधि-विधान से स्नान तक नहीं कराया जा रहा, जो अखाड़े की प्राचीन परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
निष्कासित लोग अखाड़े के नाम पर फैला रहे भ्रम, कानूनी कार्रवाई होगी, करौली शंकर महादेव,महामंडलेश्वर
दूसरी और कनखल स्थित अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मीडिया संयोजक एवं नया उदासीन बड़ा अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए जिन लोगों ने समर्थन देने और शिकायत करने का दावा किया है, उन्हें कई वर्ष पहले ही अखाड़े से निष्कासित किया जा चुका है। उन पर अखाड़े की संपत्ति के दुरुपयोग और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वे अब भी अखाड़े से जुड़े होने का दावा कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


















