एम्स, ऋषिकेश में एकीकृत कैंसर वेलनेस क्लिनिक का विधिवत शुभारंभ किया गया। बताया गया है कि इस क्लिनिक का संचालन इंटीग्रेटिव मेडिसिन एवं आयुष विभाग, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सहयोग से करेगा। क्लिनिक का समग्र कैंसर रोगियों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस अवसर पर निदेशक एवं सीईओ एम्स, प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने बताया कि यह क्लिनिक आधुनिक ऑन्कोलॉजी को भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों—योग, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्ध और हर्बल चिकित्सा—के साथ जोड़कर रोगियों और उनके परिजनों को व्यापक सहयोग प्रदान करेगा।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत जो शुद्धता, दृढ़ता और उपचार के प्रतीक पवित्र तुलसी पौधे पर जलार्पण से हुई, इसके पश्चात मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. मीनू सिंह, ने क्लिनिक का वर्चुअल उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा आयुष न्यूज़लेटर: “गंगा प्रवाह” (खंड 1, अंक 2) का विमोचन किया गया। बताया गया है कि न्यूज लेटर में विभाग की शैक्षणिक, नैदानिक और जनसंपर्क गतिविधियों को दर्शाया गया है।
आयोजन समिति की ओर से कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों और वक्ताओं को शॉल और पवित्र तुलसी पौधे भेंट किए गए।
इस अवसर पर निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने आयुष विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कैंसर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, योग, सिद्ध और हर्बल चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन पद्धतियों के सिद्ध लाभ हैं और इन्हें पर और अधिक गहराई से शोध की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने योग क्रियाओं के शारीरिक संरचना पर सकारात्मक प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित बताया है। यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान में चर्चित अवधारणाएं जैसे E=mc² और क्वांटम फिजिक्स में अध्यात्मिक विचार भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में पहले से मौजूद हैं और इन पर व्यवस्थित शोध किया जा सकता है।
उन्होंने टाटा मेमोरियल अस्पताल के अध्ययन का उल्लेख भी किया, जिसमें पाया गया कि जीवनशैली में सुधार से कैंसर की प्रगति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और रेजिडेंट डॉक्टरों को इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और पारंपरिक एवं आधुनिक चिकित्सा के संगम को त्रिवेणी संगम की संज्ञा दी।

संस्थान के संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय ने इस पहल को रोगियों के कल्याण के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि कैंसर रोगी का उपचार अर्थात समग्र मानव के मानसिक-शारीरिक- भावनात्मक आयामों का उपचार है । उन्होंने जोर दिया कि एकीकृत पद्धति और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली कैंसर उपचार में महत्वपूर्ण योगदान देती है। डीन एकेडमिक प्रो. वार्ष्णेय ने बताया कि आहार, योग, ध्यान, स्वस्थ्य के प्रति जागरूकता जैसी विधियां तनाव प्रबंधन और रोगी के देखभाल में अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैंसर उपचार केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि डॉक्टर और रोगी, विज्ञान और सहानुभूति, रोगी और आशा के बीच संवाद है। उन्होंने उद्धृत किया: “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत” – अर्थात विजय या पराजय मन में निहित है।
डॉ. मोनिका पठानिया (विभागाध्यक्ष, आयुष एवं इंटीग्रेटिव मेडिसिन) ने नियमित इंटीग्रेटिव क्लिनिक को विशेषीकृत कैंसर वेलनेस क्लिनिक में विस्तारित करने पर विचार साझा किए। उन्होंने क्लिनिक के उद्देश्यों और कार्यप्रवाह को प्रस्तुत किया।
डॉ. मोनिका पठानिया ने रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग को इस संयुक्त उपक्रम में सबसे पहले जुड़ने के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि विभाग ने उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी है। सेवाएं प्रारंभ में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. दीपा जोसफ की देखरेख में दी जाएंगी और शीघ्र ही अन्य विभागों तक विस्तारित की जाएंगी, जो कैंसर रोगियों का उपचार करते हैं।
उन्होंने बताया कि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं और अब समय आ गया है कि इन्हें व्यवहार में लाकर रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान की जाए। उनका जोर वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करने और विभिन्न विभागों के साथ एकीकृत करने पर है। योग और सिद्ध चिकित्सा को सहायक देखभाल के रूप में दिया जाएगा, जबकि प्राथमिक उपचार आधुनिक चिकित्सा ही रहेगा। यहां आधुनिक चिकित्सा के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर और आयुष चिकित्सक मिलकर रोगियों के स्वास्थ्य हित में कार्य करेंगे। यह विभाग विभिन्न विभागों के बीच सेतु का कार्य करेगा।

इस अवसर पर कुछ संकाय सदस्यों ने, जो कि स्वयं कैंसर से ग्रसित रहे हैं और अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, उन्होंने यह बताते हुए अपने अनुभव साझा किए, कि योग और एकीकृत चिकित्सा ने उन्हें कैंसर चुनौतियों का सामना करने में आत्मविश्वास और दृढ़ता दी।
क्लिनिक में निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध होंगी
प्रमाण-आधारित योग और ध्यान कार्यक्रम
सिद्ध चिकित्सा जैसे कायाकल्प, वर्मम और ठोक्कनम
जीवनशैली मे बदलाव जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और उपचार के दुष्प्रभाव को नियंत्रित करता है |
इस अवसर पर डॉ. सोनिया सोफता (वरिष्ठ परामर्शदाता रेडियोलॉजिस्ट) एवं कैंसर सर्वाइवर, ने एक प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। जिसमें उन्होंने कैंसर देखभाल में श्वसन अभ्यास (Breathwork) और योग के वैज्ञानिक प्रमाणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिसमें दृढ़ता और रोगमुक्ति (Remission) की यात्रा शामिल थी। इस दौरान उन्होंने एक Breathwork Meditation Session भी आयोजित किया, जिसमें प्रतिभागियों को शांति और संतुलन का अनुभव कराया। कार्यक्रम के तहत उन्होंने Evidence-based Yoga Medicine पर व्याख्यान दिया, जिसमें योग और ध्यान को कैंसर उपचार के पूरक के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में लगभग 100 से अधिक लोगों ने शिरकत की। जिनमें विभिन्न विभागों के प्रमुख, वरिष्ठ संकाय सदस्य, छात्र और शोधकर्ता शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीलॅय मोहंती (एसएमओ, आयुष) डॉ. श्वेता मिश्र (medical officer-योग), डॉ. मिरुनालिनी (Medical Officer- सिद्धा ) ने संयुक्तरूप से किया। कार्यक्रम में मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डॉ. सत्यश्री बालिजा तथा विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने भागीदारी की।


















