आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती निकली शांतिकुंज की कांवड़
सावन की पावन बेला में शांतिकुंज परिवार ने शिवभक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता का संदेश देते हुए वाहन कांवड़ यात्रा निकाली। शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली गई यह यात्रा शांतिकुंज से ज्वालापुर तक गई। यात्रा को शांतिकुंज महिला मंडल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पंड्या ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यात्रा की अगुवाई अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने की। दोनों यात्रा के प्रारंभ से लेकर समापन तक कार्यकर्ताओं के साथ रहे। यात्रा में करीब डेढ़ सौ छोटे-बड़े वाहन शामिल रहे। दोपहिया वाहनों पर तिरंगा एवं केसरिया ध्वज लहराते रहे। वहीं कारों में शांतिकुंज के संगीत विभाग के भाई प्रज्ञागीत गाते हुए चल रहे थे। कार्यकर्ता ‘स्वच्छ हरिद्वार-स्वस्थ हरिद्वार’ तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नारे भी लगाकर आमजन को स्वच्छता एवं प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे थे।




यात्रा सड़क मार्ग से ज्वालापुर पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से ही देवसंस्कृति विश्वविद्यालय पहुंची। यहां सभी कार्यकर्ता प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के भाव से विश्व कल्याण, सुख-शांति एवं मंगल की प्रार्थना की गई।

इस अवसर पर दिये अपने संदेश में श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि कांवड़ यात्रा धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति के साथ आत्मसंयम, सेवा और लोकमंगल की साधना भी है। भगवान शिव का जीवन त्याग, तपस्या और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। इसलिए शिवभक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक होना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार तीर्थनगरी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर ही उनकी सार्थकता बढ़ाई जा सकती है।
वहीं विदेश प्रवास पर गए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या वर्चुअल माध्यम से यात्रा से जुड़े। उन्होंने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते हुए शिवभक्ति के साथ रचनात्मक एवं जनजागरण के कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शांतिकुंज परिवार की इस वाहन कांवड़ यात्रा ने आस्था, अनुशासन, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।


















