तकनीक बच्चों के विकास का माध्यम बने, बचपन का विकल्प नहीं : ललित मिगलानी

बच्चों के अनियंत्रित इंटरनेट इस्तेमाल पर जताई चिंता
ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया से बच्चों की पढ़ाई, नींद और एकाग्रता प्रभावित होने का खतरा-एडवोकेट ललित मिगलानी
हरिद्वार, 30 सितम्बर। उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता ललित मिगलानी ने बच्चों के अनियंत्रित इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट शिक्षा, जानकारी और संचार का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन इसका असीमित उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और लगातार स्क्रीन पर रहने की आदत से बच्चों की पढ़ाई, नींद, एकाग्रता, पारिवारिक संवाद और सामाजिक व्यवहार प्रभावित हो सकता है। वहीं साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अनुचित सामग्री और फर्जी पहचान जैसे जोखिम भी बच्चों के सामने बने रहते हैं। मिगलानी ने कहा कि इंटरनेट पर पूरी तरह रोक लगाना समाधान नहीं है। बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर उम्र के अनुसार उचित सीमाएं तय करने के साथ उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और संवाद बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने विद्यालयों में साइबर सेफ्टी और डिजिटल लिटरेसी को जागरूकता कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही बच्चों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क के खतरों के प्रति जागरूक करने तथा जरूरत पड़ने पर पैरेंटल गाइडेंस और पैरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक बच्चों के विकास का माध्यम बने, उनके बचपन का विकल्प नहीं। खेल, पुस्तक-पठन, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के अवसर बढ़ाकर बच्चों को संतुलित जीवन की ओर ले जाना जरूरी है। साइबर अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में बच्चों को चुप रहने के बजाय अभिभावकों, विद्यालय अथवा संबंधित प्राधिकरण से तत्काल सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।