देसंविवि की रामलीला में पहली बार सभी कलाकार मातृशक्ति
रावण दहन के साथ दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि) में विजयादशमी का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित रामलीला में पहली बार सभी पात्रों की भूमिका मातृशक्ति ने निभाई। नवरात्र साधना के साथ अभ्यास कर रही बहिनों ने रामलीला के मंचन से मर्यादा, साहस, त्याग और नारी सामर्थ्य का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में अट्टहास करते रावण के पुतले का दहन किया गया, जो कुछ ही समय में धू-धू कर जल उठा।
इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने अपने संदेश में कहा कि जीवन में सत्य, मर्यादा और सदाचार की सदैव विजय होती है। भगवान श्रीराम का जीवन आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और लोकमंगल की प्रेरणा देता है। हमारी बहिनों द्वारा रामलीला के सभी पात्रों का निर्वहन नारी सामर्थ्य और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में नारी को समाज निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति माना गया है।” देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि रामलीला एक सांस्कृतिक मंचन के साथ ही जीवन में आदर्शों को अपनाने का अवसर है।
रामलीला में राम की भूमिका रजनी विश्वकर्मा, सीता की दीपिका गिरि, लक्ष्मण की करिश्मा दरवई और हनुमान की भूमिका चांदनी ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। रावण दहन के साथ उपस्थित विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं ने अहंकार, अन्याय और बुराइयों को त्यागकर सदाचार अपनाने का संकल्प लिया। विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ नारी सशक्तीकरण का भी प्रेरक उदाहरण बना। रामलीला के सभी पात्रों का मातृशक्ति द्वारा निर्वहन इस बात का प्रतीक रहा कि महिलाएं सांस्कृतिक परंपराओं के संवहन और समाज में सकारात्मक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।




















